मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में सुधार कैसे करें ?

GoGramin > Blog > Cattles > मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में सुधार कैसे करें ?

improve soil quality with fertilizers

मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में सुधार कैसे करें ?

सभी पाठकों को नमस्ते। आज, हम आपकी खेत की मिट्टी को स्वस्थ और उपज बढ़ाने के कुछ तरीक़े और सुझाव सांझा करेगें।

जैविक खेती के लिए हमें स्वस्थ मिट्टी की आवश्यकता होती है, क्योंकि हमें किसी भी कृत्रिम रसायन का उपयोग करने की अनुमति नहीं है पौधे की आवश्यकता को पूरा करने के लिये। हम जैविक खाद का प्रयोग करते हैं, जो कृत्रिम की तुलना मे धीमी गति से कार्य करते हैं |

मृदा स्वास्थ्य का निर्धारण करने के लिए मिट्टी के विभिन्न गुण क्या है ?

भौतिक गुण :-

                शारीरिक रूप से स्वस्थ मिट्टी सभी मिट्टी के जानवरों और पौधों की जड़ों को श्वसन के लिए पर्याप्त हवा के साथ रहने की जगह प्रदान करती है। मशीनरी के कोमल उपयोग के मिट्टी की बनावट को बनाए रखा जा सकता है। कुदाल परीक्षण से भौतिक गुणों को पहचाना जा सकता है।

रासायनिक गुण :-

                     ये व्यक्तिगत पोषण तत्वों और प्रदूषकों को मापने से निर्धारित होते हैं। उदहारण – पी एच स्तर । रासायनिक रूप से समृद्ध मिट्टी में पौधों की वृद्धि के लिए सभी आवश्यक रासायनिक तत्त्व और कार्बनिक योगिक होते हैं। पिछले अधिक दोहन के मामले मे पहले मिट्टी को संतुलित करने की जरूरत है।

 

जैविक गुण :-

                ये जानवरों, पौधों और सूक्ष्मजीवों के बीच संतुलन से निर्धारित होते हैं, जो सहजीवी रूप से कम करते हैं। यह ज्यादातर केचुओं और अन्य सहायक सूक्ष्मजीवों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

मृदा जीवों का योगदान :-

–  उपजाऊ मिट्टी में जीवों की एक समृद्ध विविधता होती है जो मृत पौधों की सामग्री और उनके मार्ग क्षेत्र की तलाश में मिट्टी की सबसे ऊपरी परत मे पंक्तियों का निर्माण करती है।

– स्प्रिंगटेल्स, माइट्स और मिलिपेडस कचरे को कार्बोनिक पदार्थों में तोड़ते हैं।

केंचुए - उपजाऊ मिट्टी के मुख्य निर्माता :-

– एक पीढ़ी और अधिकतम आठ कुकुन के साथ केंचुआ धीमी गति से प्रजनन करता है। ये 5-8 साल तक जीवित रहते हैं। हालांकि ये सबसे लंबे समय तक जीवित रहते हैं। हालांकि ये सबसे लंबे समय तक जीने वाले मिट्टी के जानवर हैं।

– केंचुआ समृद्ध कृषि योग्य भूमि और घास के मैदान के बीच तुलना में देखा गया कि कृषि योग्य भूमि में औसतन 5 गुना अधिक नाइट्रोजन, 7 गुना अधिक फास्फोरस और 11 गुना अधिक पोटाशियम होता है। कार्बनिक पदार्थों के गहन मिश्रण से मिट्टी के सूक्ष्मजीव और केचुओं का बलगम मिट्टी की सरंचना करने मे सहायता करते हैं। यह जल और पोषक तत्वों को बनाए रखने में सहायता करता है।

– इस तरह केंचुए भारी मिट्टी को ढीला का देते हैं और रेतीली मिट्टी को जोड़ कर रखते हैं। मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता को 10 गुना बढ़ा देते हैं। वे प्रति हेक्टेयर/वर्ष लगभग 6 टन मृत कार्बनिक पदार्थ तोड़ते हैं। वे अपने मार्ग में मिट्टी उपयोगी बैक्टीरियां और कवक के उपनिवेशण को भी बढ़ावा देते हैं।

केंचुओं की रक्षा कैसे करें :-

1. जुताई और मशीनीकरण :- जुताई के लिए हल और रोटेटिंग मशीनों का उपयोग किया जाता है। जुताई के मौसम के आधार पर हल से 25% और रोटेटिंग मशीन से 70% केंचुओं की हानि होती है। 

– मार्च/ अप्रैल और सितंबर/अक्टूबर मे जुताई से बचना चाहिए क्योंकि यह केंचुओं के लिए सक्रिय समय होता है। जुताई करने का सबसे अच्छा समय तब होता जब मौसम ठंडा या शुष्क हो क्योंकि उस समय केंचुए गहरी मिट्टी में होते हैं।

– भारी मशीनरी से बचें, सुखी और स्थिर मिट्टी की खेती करें।

 

2. फसल का चक्रीकरण :- फसल चक्र में बारहमासी और गहरी जड़ों, वाली नकद फसल के साथ तिपतिय घास और हरी खाद से भरपूर फसल केंचुओं के लिए प्रचुर मात्रा में पोषण प्रदान करती है।

– पौधों का आवरण विशेष रूप से सर्दियों के दौरान केंचुओं की गतिविधि को बढ़ावा देता है।

– उदहारण – गेहूं, बरसीम, गन्ना, चावल, जवार, सब्जियों आदि के बीच फसल चक्र।

मिट्टी की उर्वकता में सुधार के लिए कुछ अन्य स्त्रोत :-

जैविक खाद :- जैविक उर्वरकों मे खाद और हरी जैविक सामग्री शामिल हैं।

– सड़ाने और अच्छी तरह घूमाने से अच्छी खाद बनती है। थोड़ी पुरानी और भूरे रंग की खाद सबसे अच्छी होती है।

– भूरी खाद को हरी खाद के साथ 1:1 के अनुपात मे मिलाया जाता है। हरी खाद नाइट्रोजन की पूर्ति करती है।

पैक्ड जैविक खाद :- कई कंपनियां किसानों की सहायता करने के लिए जैविक खाद का निर्माण कर रही है। खाद को विशेष सावधानी से तैयार किया जाता है। वे मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं और पौधों की वृद्धि और उपज को भी बढ़ावा देते हैं।

उदाहरण – नुब्रांच, बायोलेटर, बूस्टर, कार्बोनिल, ऐयररूट

Nubranch
Biolator
Boostur
Carbonil
Airoot

मिट्टी के कटाव से बचाव :-

– मिट्टी के कटाव से पोषक तत्वों का प्रवाह होता है और परिमाणस्वरूप भूमि बंजर बन जाती है।

– कटाव को हम मेढ़ बनकर, पलवार और जुताई ना करके बचा सकते हैं।

जंगली किस्मों के प्रयोग :-

व्यापक किस्मों को कम शाकनाशी और कीटनाशकों की आवश्यकता होती है जो उपज में सुधार करते हैं और मिट्टी में हानिकारक योगिकों के निपटान को रोकते हैं।

– जंगली किस्में खरपतवारों की बेतहर सहयोगी होती हैं और उनकी वृद्धि को नियंत्रित करती हैं।

यदि आप जैविक खेती पर अपना अनुभव या विचार सांझा करना चाहते हैं, तो कृप्या कमेंट भाग में अपने विचार लिखें ।

 

धन्यवाद ।

अपने खेत के कीड़ों से प्यार करना सीखें ; यह सबसे अच्छा पशुधन निवेश है, जो आप अपने खेत में करेंगे ।

Written By Ms. Renu  Rani

Agronomist, M.Sc Biotechnology

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Download eSetu APP